इस भागती सी ज़िंदगी मे
एक पल तो कभी अपना हो
इस नामुराद सी दुनिया मे
अपना भी कोई सपना हो.
कई चेहरे मिलते है रोज यहाँ
पर इन चेहरों मे कोई अपना कहाँ
हर दिल जहाँ बस इनसानियत पे धड़के
आए वक़्त कभी तो ले चल वहाँ
इन हंसते मुस्कुराते मुखोटों मे
कहीं तो एक साची मुस्कान हो.
लोग भूल चुके है अब वफ़ा के माइने
कहीं तो उसकी भी कोई पहचान हो.
मुदातो से भीड़ मे तन्हा है
आज कल वो सचे यार कहाँ.
एक बचपन मे थोड़ी मासूमियत थी बाकी
हम उससे भी आज कल रुसवा करते है यहाँ
इस दिल-ए-रेगिस्तान मे यारों
कभी तो मोहब्बत की बरसात हो.
बोहट देख चुके बेवफ़ाई का अंधेरा
कभी तो उलफत-ए-रोशनी से मुलाकात हो.
इस भागती सी ज़िंदगी मे
एक पल तो कभी अपना हो
एक पल तो कभी अपना हो
इस नामुराद सी दुनिया मे
अपना भी कोई सपना हो.
कई चेहरे मिलते है रोज यहाँ
पर इन चेहरों मे कोई अपना कहाँ
हर दिल जहाँ बस इनसानियत पे धड़के
आए वक़्त कभी तो ले चल वहाँ
इन हंसते मुस्कुराते मुखोटों मे
कहीं तो एक साची मुस्कान हो.
लोग भूल चुके है अब वफ़ा के माइने
कहीं तो उसकी भी कोई पहचान हो.
मुदातो से भीड़ मे तन्हा है
आज कल वो सचे यार कहाँ.
एक बचपन मे थोड़ी मासूमियत थी बाकी
हम उससे भी आज कल रुसवा करते है यहाँ
इस दिल-ए-रेगिस्तान मे यारों
कभी तो मोहब्बत की बरसात हो.
बोहट देख चुके बेवफ़ाई का अंधेरा
कभी तो उलफत-ए-रोशनी से मुलाकात हो.
इस भागती सी ज़िंदगी मे
एक पल तो कभी अपना हो