हर चेहरे पे चेहरा...
और हथेली मे बस फिलाल है
दुनिया के इश्स सानाते मे भी
दर्द का ही बवाल है...
क्यूँ इंतेज़ार है तुझे
नूर ए इनसानियत के दर्प का
यहाँ इंसान नही है अब कोई
बस सब अपने आप मे सवाल है..
और हथेली मे बस फिलाल है
दुनिया के इश्स सानाते मे भी
दर्द का ही बवाल है...
क्यूँ इंतेज़ार है तुझे
नूर ए इनसानियत के दर्प का
यहाँ इंसान नही है अब कोई
बस सब अपने आप मे सवाल है..
No comments:
Post a Comment